Tuesday, June 23, 2020

ब्रेकिंग: चीन ने अन्तरिक्ष में छोड़े अपने खतरनाक हथियार, कभी भी कर सकता है गुप्त अटैक

रूस के विक्ट्री डे परेड से ठीक एक दिन पहले रूसी वेव पोर्टल rt.com की एक रिपोर्ट ने रूस और अमेरिका के होश फाख्ता कर दिए हैं। इस रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की गयी है कि एटमी हथियारों से लैस चीन का सैटेलाइट अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा है। इसके निशाने पर अमेरिका और रूस के इलेक्ट्रिक ग्रिड हैं। ध्यान रहे, चीन को अच्छी तरह मालूम है कि कंवेशनल वॉर की स्थिति में चीन अमेरिका से कभी जीत नहीं सकता। इसलिए चीन ने पहले अमेरिका की स्पेस सुरक्षा में सेंध लगाई और वहां से एटमी हथियारों से लैस सैटेलाइट की तकनीकि चुराई और अब अमेरिका की चुराई गयी तकनीकि से हथियार बनाकर उसी पर दागने की तैयारी में है।

रूस की चिंता का विषय यह है कि अमेरिका के बाद चीन का अगला शिकार रूस हो सकता है।
क्योंकि अमेरिका के बाद रूस ही दूसरी ताकत है जो चीन की बादशाहत में बाधा बन सकता है। चीन और रूस भले ही इस समय दोस्ती की राह पर चलते दिखाई दे रहे हों लेकिन वो पुराने समय में एक दूसरे के दुश्मन रह चुके हैं और भविष्य भी दुश्मनी वाला ही है। चीन ने बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के जरिए रूस की भूमिका शून्य कर देने की महीन चाल पहले ही चल दी है। रूस ने डिप्लोमेटिक चैनलो के जरिए अमेरिका को कई बार यह संदेश भिजवाया था कि वो हथियार संधियों को न तोड़े लेकिन अब इसका खामियाजा अमेरिका ही नहीं रूस और बाकी देशों को उठाना पड़ सकता है।

दरअसल ये रिपोर्ट अमेरिका के एक एनजीओ ने जारी की है जिसे rt.com ने पब्लिश किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने अमेरिकी पॉवर ग्रिड पर &#8216इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्सेस&#8217 को हथियार बनाकर हमले के तीन तरीके ईजाद कर लिए हैं। पहला तो पूरी तरह से कंवेंशनल तरीका है। इस तरीके में बैलेस्टिक मिसाइल के जरिए वार हेड छोड़े जाते हैं और लक्ष्य के ठीक ऊपर हवा में विस्फोट कर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव पैदा की जाती हैं। दूसरा तरीका हाइपर सोनिक मिसाइल से हमला है। तीसरे तकनीकि रूस और अमेरिका के बाद शायद अब चीन के पास भी है।

यह वही तकनीकि जिसमें एटमी हथियारों से लैस चीन का सैटेलाइट अपने शिकार पर लगातार निगाह रख रहा है और किसी भी समय अंतरिक्ष से सीधे अपने लक्ष्य को ध्वस्त कर सकता है। ध्यान रहे, रूस ने अमेरिका से हमेशा यही अपेक्षा की थी कि अंतरिक्ष को हथियारों की दौड़ से बाहर रखा जाये। क्यों कि अंतरिक्ष युद्ध से पृथ्वी की सुरक्षा खतरे में है। वहीं अमेरिकी सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेस के मिलिटराजेशन के लिए रूस की नीतियां जिम्मेदार हैं। इन दोनों के परस्पर झगड़े का फायदा उठाकर चीन कही आगे निकलता दिखाई दे रहा है।

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