Monday, June 29, 2020

देखें, NASA दे रहा 26 लाख रुपए जीतने का मौका, बस करना होगा टॉयलेट डिजाईन..

आज एक बार फिर मै कुछ टेक्नोलॉजी से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

अंतरिक्ष (Space) हो या चांद(Moon) वहां जाना बहुत ही खर्चीला और जोखिम भरा काम है. लेकिन आज दुनिया के लिए अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में भेजना कोई नामुमकिन काम नहीं रह गया है. फिर भी अंतरिक्ष में जाना एक बहुत ही मुश्किल काम है और उसमें कई चुनौतियां हैं. अंतरिक्ष अनुसंधान में कई विषय ऐसे हैं जो अंतरिक्ष यात्रा की मुश्किलों को हल करने में जुटे हुए हैं. ऐसी ही एक समस्या है अंतरिक्ष या चांद पर नित्यकर्मों से निपटने की जरूरत. इसे सुलझाने के लिए नासा (NASA) ने लोगों को एक चैलेंज दिया है जिससे लोगो लाखों कम सकते हैं.

एस्ट्रोनॉट बुद्धिमान और बहादुर होते हैं लेकिन अंतरिक्ष में भी उनकी जरूरतें इंसान की तरह होती हैं.
अंतरिक्ष में उन्हें भी मलमूत्र त्यागने की जरूरत होती है. नासा को अपने एस्ट्रोनॉट्स के लिए बाथरूम संबंधी इस समाधान की जरूरत है. 1975 में जब अपोलो मिशन खत्म हुआ तब इंजीनियरों ने मलमूत्र विसर्जन को अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक गंभीर चुनौती बताया था. नासा ने कुछ उपकरण तो बनाए हैं लेकिन समस्या हल नहीं हुई है.

अब नासा ने इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए आम लोगों को भी शामिल करनेका फैसला किया है. नासा चाहता है कि लोग उसके एस्ट्रोनॉट्स के लिए माइक्रोग्रैविटी और चंद्रमा जैसी जगह पर कम गुरुत्वाकर्षण वाले इलाके में काम कर पाने वाला टॉयलेट के डिजाइन बनाकर उसे भेजें.

इस काम के लिए नासा ने 26 लाख से ज्यादा का इनाम भी रखा है. नासा अब चांद पर फिर से जाने की तैयारी कर रहा है और वहां अपने एस्ट्रोनॉट्स को लंबे समय तक रखा जा सके. इसकी तैयारी भी कर रहा है. बताया जा रहा है कि नासा की योजना चांद पर एक बेस कैम्प बनाने की है जहां लोग लंबे समय तक रह सकें. इसमें रहने की खास जगह, उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करना भी शामिल है.

नासा का आर्टिमिस मून मिशन एक महिला और एक पुरुष यात्री को चंद्रमा की सतह पर उतारने का काम साल 2024 तक करेगा. आर्टिमिस कार्यक्रम चांद से मंगल तक के अन्वेषण का हिस्सा है जिसमें चांद की यात्रा का अनुभव मंगल की यात्रा के लिए उपयोग में लाया जाएगा. इसके लिए नासा ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम प्रोग्राम भी तैयार कर रहा है. नासा के विशेषज्ञ अपने व्यवसायिक साझेदारों के साथ मिल कर उनके ह्यूमन लैडिंग सिस्टम पर काम करेंगे.

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