Monday, July 27, 2020

Krishna Janmashtami 2020: इस दिन मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत हो जाता है। इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनाई जाएगी। भगवान श्री कृष्ण का पूरा बचपन उनकी अद्भुत लीलाओं से भरा पड़ा है। साथ ही उनकी युवावस्था की भी कई मनोरम कहानियां प्रसिद्ध हैं।

पौराणिक गंथों और शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणा नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है।

कब हुआ भगवान श्री कृष्ण का जन्म

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के ही जन्मोत्सव को कहा जाता है। पौराणिक गंथों और शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि के समय हुआ था। भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणा नक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली माना जाता है। इसे जन्माष्टमी के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।

जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त को पड़ रही है। जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 4 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 48 मिनट के बीच है। व्रत पारण का मुहूर्त 12 अगस्त को 11 बजकर 15 मिनट के बाद है। अष्टमी तिथि का आरंभ 11 अगस्त को 9 बजकर 6 मिनट से 12 अगस्त को 11 बजकर 15 मिनट तक है।

व्रत और पूजा विधि

इस व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारण से व्रत पूरा होता है। इस व्रत को करने वाले को चाहिए कि व्रत से एक दिन पूर्व यानी सप्तमी को हल्का तथा सात्विक भोजन करें। रात्रि को स्त्री संग से वंचित रहें और सभी ओर मन और इंद्रियों पर काबू रखें।

व्रत वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद होकर सभी देवताओं के नमस्कार करे पूर्व या उत्तर को मुख करके बैठें। हाथ में जल, फल और पुष्प को लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल स्नान करने के लिए देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाए। अब सुतिका गृह में सुंदर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश की स्थापना करें।

इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या संुदर चित्र का स्थापना करें। पूजा में देवकी, वासुदेव, बलराम, नन्द , यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम लेते हुए विधिवत पूजा करें। यह व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज नहीं खाया जाता है। फलाहर के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है।

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