Friday, August 21, 2020

देखें ,बड़ा खुलासा: बिहार में हो रही कोरोना दवा की ब्लैक मार्केटिंग, रहे सतर्क!..

आज एक बार फिर मै जीवन से जुड़े कुछ जरुरी तथ्यों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

पटना एम्स के नजदीक स्थित सविता दवा दुकान में गुरुवार को औषधि नियंत्रक पटना ग्रामीण की तीन सदस्यीय टीम ने छापेमारी की। कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में प्रयुक्त रेमडेसिवीर इंजेक्शन तय मूल्य से अधिक कीमत पर बेची जा रही थी। टीम ने कालाबाजारी की सूचना मिलने पर छापा मारा। इस दौरान दवा दुकानदार छेदी टोला निवासी प्रवीण कुमार व इसके स्टाफ कैला, नगर नौसा, नालंदा निवासी चंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान एम्स के नजदीक अन्य दवा दुकानदारों में भी खलबली मच गयी। आधे से ज्यादा दवा दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें बंद कर फरार हो गये।

औषधि निरीक्षक पटना मो. कयूमुद्दीन अंसारी के नेतृत्व में छापेमारी हुई।
मो. अंसारी ने बताया कि पटना एम्स में कोरोना पीड़ित आरा निवासी देवंती देवी का इलाज चल रहा है। देवंती देवी की स्थिति गंभीर थी। कोरोना केगंभीर मरीजों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन की छह डोज दी जाती है। देवंती देवी के पुत्र मुकेश कुमार आर्या ने एम्स के नजदीक सविता मेडिकल से चार पीस रेमडेसिवीर इंजेक्शन खरीदे थे। रेमडेसिवीर के कवर पर प्रिंट 48 सौ रुपये था, लेकिन छह हजार रुपये लिये गये। चार पीस का 24 हजार रुपया वसूला गया। प्रत्येक रेमडेसिवीर पर दवा दुकानदार द्वारा 12 सौ रुपये अधिक लिया गया। मरीज के अटेंडेंट के पास इस खरीद का बिल भी है।

उन्होंने कहा कि इसकी शिकायत मिलने के बाद सहायक औषधि नियंत्रक पटना ग्रामीण ने तीन सदस्यीय टीम गठित की। टीम में औषधि निरीक्षक पटना मो. कयूमुद्दीन अंसारी, संजय कुमार पासवान व राजेश कुमार सिन्हा थे। स्थानीय पुलिस की मदद से छापेमारी की गयी। छापेमारी में आरोप सत्य पाया गया। इसके बाद मेडिकल संचालक प्रवीण कुमार व इसकेएक स्टाफ चंदन कुमार की गिरफ्तारी की गयी। उन्होंने कहा कि रेमडेसिवीर की सप्लाई सिर्फइंस्टीट्यूशन में होती है। यह दवा दुकान में कहां से आयी, इसका भी जानकारी रेमडेसिवीर कम्पनी से ली जायेगी। इस मामले में कई और अहम जानकारी मिली है। इसमें एक बड़ा रैकेट होने की बात सामने आयी है। छापेमारी के दौरान वीडियोग्राफी भी हुई है।

एमआरपी पर अंकित दर से अधिक मूल्य लिया जाना ड्रग प्राइज कंट्रोल ऑडर 2013 केअनुसार ओवर प्राइजिंग का मामला है। इस मामले में फुलवारीशरीफ थाना में क्षेत्रिय ड्रग इंस्पेक्टर संजय कुमार पासवान केलिखित आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। इस संबंध में पटना एम्स में इलाजरत आरा निवासी देवंती देवी के पुत्र मुकेश कुमार आर्या ने बताया कि मेरे पास एम्स से इमरजेंसी कॉल आया कि छह पीस रेमडेसिवीर इंजेक्शन लाकर दीजिए, आपकी मां को देना है। एम्स केपास ही एक महिला ने बताया कि सविता मेडिकल में मिलेगा। जब यहां आया तो बोला गया आधे घंटे में मिलेगा, लेकिन प्रत्येक रेमडेसिवीर का छह हजार रुपया लगेगा। मुझे इसकी बहुत जरूरत थी तो मैंने चार पीस इंजेक्शन ले लिया। दो पीस मैंने इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूशन से जाकर लिया। वहां पर 54 सौ रुपये प्रिंट रेट था और 54 सौ रुपये ही लिया गया। इसी दौरान मैंने एम्स के पास 48 सौ की जगह 6 हजार रुपये लेने की बात बतायी। पूरी जानकारी लेने के बाद मैने सहायक औषधि नियंत्रक पटना ग्रामीण को इसकी सूचना दी।

कोविड 19 के इलाज के लिए अब तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो पायी है, इसलिए कोरोना के लक्षण के आधार पर ही मरीजों का अलग-अलग दवाओं से इलाज किया जाता रहा है। कोरोना वायरस से रोकथाम के लिए भी कई दवाइयों के इस्तेमाल की अनुमति दी गयी है। जिसमें रेमडेसिवीर को भी अनुमति मिली है। लेकिन रेमडेसिवीर इंजेक्शन की सिर्फ इंस्टीट्यूशन में ही सप्लाई हो रही है।

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