Friday, August 14, 2020

वो भारतीय जिन्हें पाकिस्तान बनने के बाद हाथ लगी सिर्फ गुमनामी और बदनामी!

कल यानि 15 अगस्त 2020 को भारत अपनी आजादी (Independence) का 73वां जश्न मनाने जा रहा है। आजादी (Independence) के बाद से पाकिस्तान (Pakistan) बने हुए 70 साल हो गए हैं 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश राज से आजादी मिली थी, लेकिन अंग्रेजों ने जाते-जाते देश को दो टुकड़ों में बांटकर पाकिस्तान (Pakistan) के रूप में नए देश का निर्माण कर दिया था। शुक्रवार यानि 14 अगस्त 2020 को पाकिस्तान (Pakistan) अपनी आजादी का 74वां जश्न मना रहा है।

विभाजन के दौरान कई मुस्लिम राजनेताओं ने भारत के बजाय पाकिस्तान में रहना पसंद किया था, लेकिन पाकिस्तान में उन्हें महज बदनामी और गुमनामी के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा। वहीं, कई नेता मुस्लिम लीग से जीतने के बाद वहां नहीं गए और भारत में रहते हुए सियासत में अपनी बेहतर जगह बनाने में कामयाब रहे थे।

उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा पलायन

पाकिस्तान बनने के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम समुदाय ने उत्तर प्रदेश से पलायन किया था। सयुंक्त प्रांत (आज का उत्तर प्रदेश) में 1946 में चुनाव हुए थे। उस समय सूबे में 16 सीटें सेंट्रल असेम्बली की हुआ करती थीं, जिनमें से 6 सीटें मुस्लिम समुदाय के लिए रिजर्व रहती थी, जिनमें से पांच ग्रामीण और एक शहरी सीट थी।

इन सभी छह सीटों पर मुस्लिम लीग के मुस्लिम प्रत्याशियों ने जीत दर्ज किया था। वहीं, यूपी के स्टेट असेम्बली में 66 सीटें मुस्लिम को रिजर्व थी, जिनमें से 13 शहरी, 51 ग्रामीण और दो सीटें मुस्लिम महिला के लिए आरक्षित थी। इन 66 मुस्लिम सीटों में से 54 सीटों पर मुस्लिम लीग के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी।

सेंट्रल असेम्बली में यूपी अर्दल सीट

सेंट्रल असेम्बली में यूपी अर्दल सीट से नवाब मो. इस्माइल खां ने 89.56 फीसदी वोट पाकर जीत हासिल की थी। ऐसे ही मेरठ रीजन से नवाबजादा लिकायत अली खान 62.47 फीसदी, आगरा क्षेत्र से मो. यामीन खां 79.68 फीसदी, रुहेलखंड-कुमाऊ क्षेत्र से खान बहादुर हाफिज मो. जगनफर उल्ला खान 67.14 फीसदी, यूनाइटेड प्रोविन्सेस दक्षिण क्षेत्र से डॉ. जियाउद्दीन अहमद 85.28 फीसदी, लखनऊ-फैजाबाद क्षेत्र से राजा महमूदाबाद मो. अमीर अहमद खान ने 87.67 फीसदी वोट पाकर जीत हासिल की थी। भारत के अंतरिम सरकार में लिकायत अली वित्त मंत्री बने तो उन्होंने सेंट्रल असेम्बली सदस्य के तौर पर इस्तीफा दे दिया था और उनकी जगह खान बहादुर शाह नजर हुसैन चुने गए थे।

पाकिस्तान में इन्हें मिली गुमनामी

खास बात यह है कि पाकिस्तान के बनने के बाद यूपी सेंट्रल असेम्बली के छह में से पांच सदस्य पाकिस्तान जाकर बस गए और राजा महमूदाबाद मो. अमीर अहमद खान इंग्लैंड चले गए। नवाबजादा लिकायत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे।

ऐसे ही स्टेट विधानसभा में भी मुस्लिम लीग से रायबरेली सीट से मो. शमीम अहमद, फैजाबाद से मुंसी फैयाज अली, फतेहपुर-बांदा से सैय्यद हसन अहमद शाह और सहारपुर नार्थ सीट से मुनफरत अली ऐसे नेता थे, जो पाकिस्तान में 60 दिन से ज्यादा रुके थे और बाद में बस गए थे। मौजूदा पाकिस्तान की सियासत में यूपी से जीतने वाले इन नेताओं को महज गुमनामी ही नसीब में आई।

स्टेट असेम्बली में मुस्लिम लीग

वहीं, यूपी के स्टेट असेम्बली में मुस्लिम लीग से जीतने वाले चार सदस्य पाकिस्तान नहीं गए थे। नवाब जमशेद अली खान, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के ताया सुल्तान आलम खा, संडीला के नवाब एजाज रसूल की पत्नी कुदसिया बेगम और लखनऊ के बेगम हबीबुल्ला ऐसे नेता थे, जो मुस्लिम लीग से जीतने के बाद भी पाकिस्तान नहीं गए और भारत में रहे और बाद में समय से साथ उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद सियासत में आज भी इन नेताओं के परिवार भी प्रासंगिग बने हुए हैं।

:

इंटरनेट पर धमाल मचा रहा सपना चौधरी का यह नया गाना

जब रियल लाइफ में कछुए ने खरगोश को दौड़ में हरा दिया, देखें वीडियो

कोरोना वायरस लेटेस्ट अपडेट जानने के लिए WhatsApp ग्रुप को ज्वाइन करें। Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। साथ ही फोन पर खबरे पढ़ने व देखने के लिए Play Store पर हमारा एप्प Spasht Awaz डाउनलोड करें।

वो भारतीय जिन्हें पाकिस्तान बनने के बाद हाथ लगी सिर्फ गुमनामी और बदनामी! Spasht Awaz.

आप इस बार के चुनाव में किसे वोट देंगे &#8211 अभी वोट करें

No comments:

Post a Comment