Tuesday, September 15, 2020

भारत ने चीन बॉर्डर के पास बनायीं दुनियां की सबसे ऊँची मोटरेबल रोड, ड्रैगन के हर चाल पर होगी नजर

भारत ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड तैयारी की है। यह दुनिया की सबसे ऊंची सड़क पर आप अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। इसकी सबसे खास बात ये है कि इस जगह से चीन की हर चाल पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। साथ ही सीमा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को हथियार और रसद भी जल्द उपलब्ध कराए जा सकेंगे। तो चलिए जानते हैं कि जानते हैं इस रोड की खासियत और इसके लोकेशन के बारे में-

भारत ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड तैयारी की है, जिसका नाम माणा पास रोड (Mana Pass Road) है। यह दुनिया की इकलौती सबसे ऊंची मोटरेबल सड़क है, जो उत्तराखंड के चमोली-गढ़वाल जिले में चीन बॉर्डर के पास 18 हजार 192 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
चीन स्थित मानसरोवर और कैलाश पर्वत जाने का प्रमुख मार्ग भी इस माणा पास रोड से ही है। इस रोड के बनने के बाद चीन बॉर्डर की ओर भारत अब और मजबूत हो जाएगा।

यह पहले ऐसा सबसे ऊंची रोड है, जिसे ऊपर से नीचे की तरफ बनाया गया है। वरना, आमतौर पर पहाड़ों पर सड़क का निर्माण नीचे से ऊपर की तरफ होता है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने इस दुर्लभ काम को पूरा करके दिखा दिया है। जिसके बाद BRO की खूब तारीफें हो रही हैं। माणा दर्रा NH-58 का अंतिम छोर है। इसे माना ला, चिरबितया व डुंगरी ला के नाम से भी जाना जाता है।

माणा पास भारत को तिब्बत से जोड़ती है, इसे दुनिया का सबसे ऊंची परिवहन योग्य सड़क भी माना जाता है। माणा दर्रा समुद्रतल से तकरीबन 5,545 मीटर तथा 18,192 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यह उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के पास मौजूद है। इस दर्रे से चीन स्थित मानसरोवर तथा कैलाश पर्वत जाने का मुख्य मार्ग है। माणा दर्रा सर्दियों में छह महीने तक बर्फ से ढका रहता है।

माणा दर्रा, माणा शहर से 24 किलोमीटर और उत्तराखंड से हिंदू धार्मिक तीर्थ बद्रीनाथ से 27 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है। माना पास पर्यटकों के लिए अत्यन्त सुंदर और शांती वातावरण वाली जगह है। यहां पर बाइकर्स भी आना बेहद पसंद करते हैं।

बता दें कि इससे पहले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाई है। भारत ने हिमाचल प्रदेश में मनाली से लेह को जोड़ने वाली सुरंग बनाई है। इस सुरंग का नाम अटल टनल (Atal Tunnel) है। यह सुरंग रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। इन टनल के निर्माण में करीब साढ़े तीन से चार हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 10 हजार फीट पर स्थित इस टनल को बनाने में करीब दस साल का वक्त लगा है।

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