Thursday, September 10, 2020

डॉक्टर कहें या हैवान, डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत, बिल न भरने पर मां को बंधक बनाया!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

मेरठ: मेरठ के गौहर हॉस्पिटल प्रशासन ने डिलीवरी के दौरान नवजात बच्चे की मौत के बाद उसकी मां को बंधक बना लिया। नवजात की लाश उसकी नानी को सौंपकर 20 हजार रुपये जमा करने पर ही मां को डिस्चार्ज करने की शर्त रख दी। नानी अपने मृत धेवते की लाश लेकर शहर की सड़कों पर मदद के लिए धक्के खाती रही। स्वास्थ्य विभाग के दो अफसरों ने बिल माफ कराकर महिला को डिस्चार्ज कराया। पूरे मामले में जांच कमेटी बना दी गई है।

हापुड़ चुंगी के पास गौहर हॉस्पिटल है। खरखौदा क्षेत्र में गांव पीपलीखेड़ा के मुबारिक ने पत्नी गुलशन को प्रसव पीड़ा होने पर आठ सितंबर को भर्ती कराया। आरोप है कि डॉक्टर की बजाय स्टाफ नर्स से डिलीवरी कराई गई और नवजात बच्चे की मौत हो गई।
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। उनकी नहीं सुनी गई। थक-हारकर परिजनों ने गुलशन को डिस्चार्ज करने के लिए कहा तो अस्पताल ने 20 हजार रुपये बकाया बिल भरने की शर्त रख दी।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट बोल दिया कि 20 हजार रुपये न देने तक गुलशन उनके यहां बंधक रहेगी। गुलशन की मां अपने मृत धेवते को गोद में लेकर कमिश्नरी चौराहा पहुंच गई। वह बुरी तरह रो रही थी। काफी कुरेदने के बाद जब उसने बताया कि बच्चा मृत है, तो सुनकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। बोली, अस्पताल वाले उनकी बेटी को डिस्चार्ज नहीं कर रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यह मामला सीएमओ डॉ. राजकुमार के संज्ञान में आया। सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. जीके मिश्रा और डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक निगम गौहर हॉस्पिटल में पहुंचे। पूरा बिल माफ कराते हुए महिला को डिस्चार्ज कराया। निजी अस्पतालों में इलाज का कोई तय रेट नहीं है। जिला अस्पताल में डिलीवरी मुफ्त होती है। मामला सामने आने के बाद महिला को डिस्चार्ज कराते हुए अस्पताल को नोटिस दिया है। शिकायत पर जांच शुरू करा दी गई है। &#8211 डॉ. राजकुमार, सीएमओ मेरठ

निजी अस्पताल में डॉक्टर की बजाय वार्ड आया से डिलीवरी कराने का यह पहला मामला नहीं है। मेट्रो प्लाजा स्थित शिवाय हॉस्पिटल में 31 अगस्त को जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। आरोप था कि महिला डॉक्टर की बजाय सफाईकर्मी से डिलीवरी कराई गई। इस मामले में डॉ. शिखा सेठ व डॉ. विकास सेठ के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। मृतका के भाई अजय का आरोप है कि डॉक्टर अब केस वापसी का दबाव बना रहे हैं। अजय ने बुधवार को इस मामले में डीएम-एसएसपी से शिकायत की है।

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