Wednesday, September 16, 2020

चीन के कर्ज में फंसा ये देश, अब ड्रैगन ने किया पॉवर ग्रिड पर कब्ज़ा

चीन ने दुनिया के कई देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसा रहा है। अब चीन के कर्ज की जाल में नया देश लाओस फंस गया है। लाओस ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज लिया हुआ है। अब चीनी कर्ज न चुका पाने के कारण लाओस को अपना पावर ग्रिड चीन की सरकारी कंपनी को देना पड़ा है।

Laos&#8217 President Bounnhang Vorachith (L), shakes hands with Chinese President Xi Jinping (R) ahead a bilateral meeting at Diaoyutai State Guesthouse in Beijing on May 16, 2017. / AFP PHOTO / POOL / WU HONG

हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सरकार और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दिया है।

चीन अपने पड़ोसी देश लाओस में 6 बिलियन डॉलर की लागत से हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण कर रहा है।
इस ट्रैक पर पहली ट्रेन 2 दिसंबर, 2021 को लाओ राष्ट्रीय दिवस पर राजधानी वियनतियाने आएगी। इसी तारीख को 1975 में यह देश कम्युनिस्ट शासन के अंतर्गत आया था। हाल में आई रिपोर्टों से जानकारी सामने आई है कि लाओस चीन की महत्वकांक्षी योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का नया शिकार है।

चीन ने इस देश को बड़े पैमाने पर कर्ज दिए, लेकिन जब वहां की सरकार से उसके रिश्ते खराब हो गए तो वह अब कर्ज को चुकाने के लिए दबाव बना रहा है। इसकी वजह से सालाना बकाया कर्ज भुगतान की तुलना में लाओस का विदेशी मुद्रा भंडार 1 बिलियन डॉलर से भी नीचे जा पहुंचा है। लाओस के सामने अब लोन डिफॉल्टर होने का खतरा मडरा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, लाओस ने अपने सबसे बड़े कर्जदाता चीन से कुछ और समयसीमा मांगी थी।

जुलाई में वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने लाओस की रेटिंग को और घटाकर जंक स्टेट घोषित कर दिया था। मूडीज के मुताबिक, लाओस इस समय गंभीर रूप से धन की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में अगर उसे किसी देश ने कर्ज दिया तो उसके डूबने के आसार ज्यादा हैं।

लाओस सरकार ने चीन को कर्ज के बदले में नेशनल इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड का बड़ा हिस्सा चीन की सरकारी कंपनी चाइना साउथर्न पॉवर ग्रिड कंपनी को देने वाली है। इससे चीन का कर्ज चुकाने के लिए लाओस को कुछ समय मिलेगा। लाओस के ऊर्जा मंत्री खम्मानी इंथिरथ का कहना है कि चीनी कंपनी को सरकारी पावर कंपनी में स्वामित्व देने से अनुभव, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में लाभ होगा।

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