Tuesday, September 15, 2020

देखें, दुनियां के सामने बेबस हुआ चीन, जिंगपिंग इन देशों से फ़ोन पर मांग रहा मदद..

आज एक बार फिर मै कुछ टेक्नोलॉजी से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर जारी विवाद में जिनपिंग सरकार और चीन खुद फंसता जा रहा है। जब से चीन ने लद्दाख में भारतीय सीमा के पास घुसपैठ करने और क्षेत्रों पर कब्जा जमाने के मंसूबों के तहत साजिश करनीय शुरू की, तब से वह भारतीय सैनिकों से लगातार हार रहा है। वहीं अंतराष्ट्रीय मंच पर भी अलग थलग हो गया। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश चीन के खिलाफ खड़े हैं। ऐसे में अब चीन की मुश्किलें बढ़ गयी हैं।

दरअसल, चीन इन दिनों कई विवादों से घिरा है। भारत के साथ एलएसी तनाव के अलावा हांगकांग -ताइवान और साउथ चाइना सी में चीन की दादागिरी से उसके रिश्ते अन्य देशों से खराब हो गए हैं।
कोरोना को लेकर दुनियाभर में आलोचना झेल रहा चीन, इन मुद्दों पर पूरी तरह से घिर गया। अब हालात सुधारने पर विश्व पटल पर बिगड़े रिश्ते मजबूत करने के लिए जिनपिंग सरकार जुट गयी है।

इस बाबत राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को खुद जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से फोन पर बातचीत की। इसके अलावा यूरोपीय यूनियन के कई नेताओं के साथ भी जिनपिंग ने फोन पर बातचीत कर अपना पक्ष रखा है। कहा जा रहा है कि बातचीत काफी सार्थक रही है। चीन और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार, निवेश समझौते पर चर्चा की गति तेज करने पर सहमति बनी है।

बता दें कि यूरोपियन संघ चीन का सबसे बड़ा साझेदार है लेकिन इससे जुड़े 27 देश बीजिंग को लेकर अलग सोच रखते हैं। चीन ने जब हांगकांग में नया कानून लागू किया तो यूरोपियन संघ को ये पसंद नहीं आया। जर्मनी और फ़्रांस ने इसका कड़ा विरोध किया।
उनका चीन से छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में यूरोपियन संघ के परिषद अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल, आयोग अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन और संघ के विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने क्रमिक अध्यक्षता कर रहीं मर्केल का समर्थन किया है।

</>

No comments:

Post a Comment