Friday, September 18, 2020

सहयोगी भी हुए बागी, किसान बिल ने बढ़ाई मोदी सरकार की टेंशन!..

आज एक बार फिर मै खान पान से जुडी कुछ जरुरी बातों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

नई दिल्ली: कृषि संबंधी विधेयक लोकसभा से पास होने के बाद भी मोदी सरकार की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है. विपक्षी दलों और किसानों के साथ-साथ अब तो मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए के सहयोगी दल भी कृषि विधेयक के खिलाफ आवाज ही बुलंद नहीं कर रहे बल्कि साथ भी छोड़ रहे हैं. केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को मोदी कैबिनेट से कृषि संबंधी विधेयकों का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया है और इसे किसान विरोधी बताया है.

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने लोकसभा में इन विधेयकों को किसान विरोधी कदम बताया और कहा कि उनकी पार्टी की एकमात्र मंत्री इस्तीफा दे देंगी.
इसके फौरन बाद हरसिमरत कौर ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. हरसिमरत कौर बादल ने कहा,&#8217मैंने किसान विरोधी कृषि अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. मैं उस सरकार का हिस्सा नहीं रहना चाहती जो किसानों की आशंकाओं को दूर किए बिना कृषि क्षेत्र से जुड़े विधेयक लेकर आई. किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है.&#8217 इस्तीफे के बाद उन्होंने ने कहा कि हजारों किसान सड़कों पर हैं. मैं उस सरकार का हिस्सा नहीं रहना चाहती जो कि किसानों की परेशानियों का हल सुझाए बिना ही सदन में बिल पास करा लेती है.

शिरोमणि अकाली दल की नेता ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब पंजाब और हरियाणा के किसानों में कृषि से जुड़े इन विधेयकों के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है. केंद्र की मोदी सरकार तीन कृषि अध्यादेश लेकर आई है. इन अध्यादेशों को लेकर यह कहा जा रहा है कि किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य ही आमदनी का एकमात्र जरिया है, अध्यादेश इसे भी खत्म कर देगा. इसके अलावा कहा जा रहा है कि ये अध्यादेश साफ तौर पर मौजूदा मंडी व्यवस्था का खात्मा करने वाले हैं.

पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले तीन महीने से इन अध्यादेशों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. हालांकि मोदी सरकार इन्हें किसान हितैषी बता रही है और अपने स्टैंड पर कायम है. इसके बावजूद इन विधेयकों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में किसानों सड़क पर हैं. विपक्ष ने संसद शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि सदन में कृषि संबंधी अध्यादेशों का विरोध करेगी. अकाली दल ने भी बगावत का रुख अख्तियार कर लिया है.

लोकसभा में ये विधेयक पारित होने के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि हम किसानों के साथ खड़े हैं और उनके लिए कुछ भी करेंगे. अकाली दल के केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का अलग कदम क्या होगा ये हम पार्टी की बैठक के बाद जल्द ही बताएंगे. बादल ने हरसिमरत कौर के इस्तीफे को लेकर कहा कि शिरोमणि अकाली दल किसानों और उनके कल्याण के लिए कोई भी त्याग करने को तैयार है. इससे पहले लोकसभा में उन्होंने कहा था कि कृषि संबंधी तीन विधेयकों से पंजाब के 20 लाख हमारे किसान प्रभावित होने जा रहे हैं. 30 हजार आढ़तियों, 3 लाख मंडी मजदूरों, 20 लाख खेत मजदूरों पर भी असर पड़ेगा.

मोदी सरकार के केंद्र सत्ता में 6 साल के दौरान तमाम विधेयक संसद से पास हुए हैं, लेकिन किसी भी सहयोगी ने न तो विरोध किया और न ही इस्तीफा दिया. यह पहली बार है जब किसी मुद्दे पर बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी अकाली दल ने बिल का विरोध ही नहीं किया बल्कि मंत्रिमंडल भी छोड़ दिया है. ऐसे में एनडीए के पुराने घटक दल के कदम उठाए जाने से विपक्ष को मजबूती मिली है, जो कि मोदी सरकार के लिए चिंता का सबब है.

यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा &#8216 किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से मेरा अनुरोध है कि वे लोकसभा में कृषि सुधार विधेयकों पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह द्वारा दिए गए भाषण को जरूर सुनें.&#8217 कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का तंत्र जारी रहेगा और इन विधेयकों के कारण तंत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. तोमर ने कहा कि यह किसानों को बांधने वाला विधेयक नहीं बल्कि किसानों को स्वतंत्रता देने वाला विधेयक है.

वहीं, पीएम मोदी ने कहा, किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं. मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी. ये विधेयक वास्तव में किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं. इस कृषि सुधार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नए-नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनका मुनाफा बढ़ेगा. कृषि सुधार विधेयकों का पारित होना देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है. ये विधेयक सही मायने में किसानों को बिचौलियों और तमाम अवरोधों से मुक्त करेंगे.

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