Saturday, September 26, 2020

जानिए क्यों किया जाता है यज्ञ, हवन और यज्ञ में क्या अंतर है?

यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। हिन्दू धर्म में जितना महत्व यज्ञ को दिया गया है उतना किसी और नहीं दिया है। हमारा कोई भी शुभ-अशुभ धर्म कार्य इसके बिना पूरा नहीं होता।  यज्ञ एक विशेष धार्मिक प्रक्रिया है जिसके जरिए मनुष्य न सिर्फ भौतिक सुख बल्कि आध्यात्मिक संपदा भी प्राप्त कर सकता है।

यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म , श्रेष्ठ कर्म , सतकर्म , वेदसम्मत कर्म। सकारात्मक भाव से ईश्वर-प्रकृति तत्वों से किए गए आह्‍वान से जीवन की प्रत्येक इच्छा पूरी होती है। यज्ञ को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा गया है। यज्ञों के माध्यम से अनेक ऋद्धियां-सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।

वेदों में यज्ञ के वर्णन पर जितने मंत्र हैं उतने अन्य किसी विषय पर नहीं है। यज्ञ के साथ ही हवन भी हिंदू संस्कृति में बहुत महत्व रखता है। लेकिन यज्ञ और हवन में काफी अंतर है जिससे कई लोग अनभिज्ञ है। आज हम आपको बातएंगे की यज्ञ और हवन में क्या अंतर है-

दरअसल हवन यज्ञ का छोटा रूप है।  पूजा के बाद और मंत्र जाप के बाद अग्नि में दी जाने वाली आहुति को यज्ञ कहते हैं। यज्ञ किसी विशेष उद्देश के लिए किया जाता है। यज्ञ में देवता, आहुति, वेद मंत्र, ऋत्विक, दक्षिणा अनिवार्य रूप से होते हैं।

वहीं हवन में हवन कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निकट हवि पहुंचाने की प्रक्रिया होती है। हवि, हव्य अथवा हविष्य वह पदार्थ होता है, जिनकी अग्नि में आहुति दी जाती हैं। हवन हिंदू धर्म में शुद्धीकरण का एक कर्मकांड है। शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन किया जाता है।

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