Friday, September 25, 2020

Gandhi Jayanti: महात्मा गांधी का अतुल्य योगदान, जानिए कैसे करते थे खानपान?

दुनिया भर में 2 अक्टूबर को हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। गांधी के जाने के बाद भी उनके विचार जिंदा हैं और आगे भी जिंदा रहेंगे। महात्मा गांधी की लाइफस्टाइल इतनी कमाल की थी कि वह आज भी लोगों को मोटिवेट करती है। महात्मा गांधी शाकाहार को सबसे उत्तम आहार मानते थे। बापू अकसर अपने खानपान के साथ प्रयोग करते रहते थे।

तो आइए जानते हैं कि बापू खुद को फिट रखने के लिए कैसे करते थे खानपान…

चाय-कॉफी को त्यागा

2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में पैदा हुए मोहनदास करमचंद गांधी को पूरी दुनिया अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजती है। भारत की आजादी में महात्मा गांधी के अतुल्य योगदान पर हर भारतीय को गर्व है। महात्मा गांधी अपने सादा-जीवन और उच्च विचारों के चलते प्यार से भारतीयों के बापू बन गए। गांधी के सत्याग्रह की ही बदौलत अंग्रेज भारत छोड़ने पर मजबूर हो गए। गांधी जी शाकाहारी थे और अपने जीवन के एक वक्त में उन्होंने चाय और कॉफी तक का त्याग कर दिया था।

आम था उनकी कमजोरी

फलों के राजा आम के प्रति महत्मा गाँधी अपनी तृष्णा से परहेज नहीं कर पाते थे। अपने कई लेखों में महात्मा गांधी ने इस अतिरेक के लिए अफसोस जताया है। महात्मा गांधी को आम बेहद पसंद था। गांधी जी ने दूध का सेवन भी बंद कर दिया था। कस्तूरबा गांधी के कहने पर महात्मा गांधी बकरी का दूध पीने के लिए राजी हुई थे।

उनकी डाइट पर किताब

लेखक निको स्लेट ने महात्मा गांधी की डाइट पर लिखी किताब में कहा है कि स्वस्थ खाना गांधी जी की जिंदगी का अहम हिस्सा था। बचपन से ही महात्मा गांधी की स्वस्थ खाने के प्रति रुचि विकसित हो गई थी। महात्मा गांधी की मां धार्मिक थीं और अक्सर उपवास रखती थीं। ऐसे में वह भी अपने खानपान का विशेष ध्यान रखती थीं। स्लेट ने गांधी जी के पोषण और खानपान पर पांच साल के शोध के बाद अपनी किताब ‘गांधी’ज सर्च फॉर परफेक्ट डाइट’ किताब लिखी है।

अतिरिक्त नमक लेने से परहेज

गांधी जी को पता था कि उनके पसंदीदा फल और सब्जियों में प्राकृतिक तौर पर नमक होता है इसलिए वह अपने भोजन में अतिरिक्त नमक लेने से परहेज करते थे।  स्लेट के मुताबिक, महात्मा गांधी ने 1911 से ही नमक फ्री डाइट लेनी शुरू कर दी थी। हालांकि 1920 के बाद गांधी जी ने अपने डाइट में हल्का नमक लेना शुरू किया था। वह अपनी डाइट में प्रति दिन 30 दाने से ज्यादा नमक नहीं लेते थे।

आजादी मिलने से पहले उपवास रखे

महात्मा गांधी ने खुद लिखा है कि वह अपनी डाइट में 8 टोल अंकुरित गेहूं, 8 टोल बादाम पेस्ट के लिए, हर पत्ते के 8 टोल, छह खट्टे नींबू और 2 औंस शहद लेते थे। गांधी जी अपना पहला भोजन 11 बजे और दूसरा शाम को 6:15 बजे लेते थे। गांधी जी दिन में शहद और नींबू के साथ गर्म पानी लेते थे। गांधी जी ने आजादी मिलने से पहले कई उपवास रखे। आजादी के लिए संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने 17 बार उपवास रखा और उनका सबसे लंबा उपवास 21 दिन का था। महात्मा गांधी ने 1913 से लेकर 1948 यानी की आजादी मिलने के बाद भी उपवास रखा। अहिंसा के इस पुजारी ने खानपान के साथ जिनते प्रयोग किए शायद ही इतिहास में किसी महापुरुष ने फूड के साथ इतने प्रयोग किए हों |

खानपान को विशेष महत्व

महात्मा गांधी का मानना था कि जिस तरह से जिंदा रहने के लिए हमें हवा और पानी की जरूरत पड़ती है उसी तरह से शरीर को भी पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। ये ही वजह थी कि वह खानपान को विशेष महत्व देते थे। महात्मा गांधी का जन्म शाकाहारी परिवार में हुआ लेकिन लेखक हेनरी स्टीफंस सॉल्ट का उनके शाकाहार प्रयोग पर विशेष प्रभाव था। सॉल्ट के प्रभाव से ही महात्मा गांधी ने अपनी मर्जी से शाकाहारी भोजन चुना।

दाल-चावल का सेवन सही

महात्मा गांधी को दाल-चावल पसंद था। दाल में कार्बोहाइड्डरे और प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है। गांधी जी की ही तरह हर भारतीय दाल-चावल काफी पसंद करता है। रोटी, गांधी जी की पसंदीदा थी। वह अपने आहार में रोटी को शामिल किया करते थे।गुजराती परिवार में पैदा होने की वजह से बचपन से ही रोटी गांधी जी को पसंद थी। रोटी ऐसी चीज थी जिसे गांधी जी ने आजीवन खाया।

आहार में दही भी शामिल

गांधी जी अक्सर अपने आहार में दही को शामिल किया करते थे।जैसा कि हम जानते हैं कि हर दही और छाछ ऐसी चीज है जो हर भारतीय को लगभग पसंद होती है और लोग इसे अपने आहार में शामिल करते हैं।  दही और छाछ पाचन क्रिया के लिए बेहद लाभकारी होती है। गांधी जी को बैंगन भी पसंद था। महात्मा गांधी अपने भोजन में उबला हुए बैंगन का हिस्सा लेते थे।

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