Friday, September 25, 2020

Parma Ekadashi Vrat: कब है परमा एकादशी, जानें विधि, तिथि और कथा

अधिक मास या पुरुषोत्तम मास में कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी परमा एकादशी के नाम से जानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से दुर्लभ सिद्धियों की प्राप्ति होती है। यह एकादशी परम दुर्लभ सिद्धियों की दाता होने के कारण ही परमा के नाम से प्रसिद्ध है। यह धन की दाता और सुख-ऐश्वर्य की जननी परम पावन है एवं दुख-दरिद्रता का दमन करने वाली है। इस एकादशी में स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौदान करना चाहिए | आइए जानते हैं परमा एकादशी व्रत की विधि, तिथि और क्या है इसकी कथा ………

परमा एकादशी व्रत विधि

इस एकादशी व्रत की विधि कठिन है। इस व्रत में पांच दिनों तक पंचरात्रि व्रत किया जाता है। जिसमें एकादशी से अमावस्या तक जल का त्याग किया जाता है। केवल भगवत चरणामृत लिया जाता है। इस पंचरात्र का भारी पुण्य और फल होता है। परमा एकादशी व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:

1. सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।

2. इसके बादअपने पितरों का श्राद्ध करें।

3. भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करें।

4. ब्राह्मण को फलाहार का भोजन करवायें और उन्हें दक्षिणा दें।

5. इस दिन परमा एकादशी व्रत कथा सुनें।

परमा एकादशी तिथि

परमा एकादशी व्रत अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल यह तिथि 13 अक्टूबर मंगलवार के दिन पड़ रही है।

परमा एकादशी व्रत मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: 04 बजकर 38 मिनट से (12 अक्टूबर 2020)

एकादशी तिथि समाप्त: दोपहर 02 बजकर 35 मिनट तक (13 अक्टूबर 2020)

परमा एकादशी पारणा मुहूर्त: 06:21:33 से 08:39:39 तक (14 अक्टूबर 2020)

अवधि: 2 घंटे 18 मिनट

परमा एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी स्त्री का नाम पवित्रा था। वह परम सती और साध्वी थी। वे दरिद्रता और निर्धनता में जीवन निर्वाह करते हुए भी परम धार्मिक थे और अतिथि सेवा में तत्पर रहते थे। एक दिन गरीबी से दुखी होकर ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार किया, किंतु उसकी पत्नी ने कहा- ‘’स्वामी धन और संतान पूर्वजन्म के दान से ही प्राप्त होते हैं, अत: आप इसके लिए चिंता ना करें।’’

एक दिन महर्षि कौडिन्य उनके घर आए। ब्राह्मण दंपति ने तन-मन से उनकी सेवा की। महर्षि ने उनकी दशा देखकर उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने को कहा। उन्होंने कहा- ‘’दरिद्रता को दूर करने का सुगम उपाय यही है कि, तुम दोनों मिलकर अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करो। इस एकादशी के व्रत से यक्षराज कुबेर धनाधीश बना है, हरिशचंद्र राजा हुआ है।’’

ऐसा कहकर मुनि चले गए और सुमेधा ने पत्नी सहित व्रत किया। प्रात: काल एक राजकुमार घोड़े पर चढ़कर आया और उसने सुमेधा को सर्व साधन, संपन्न, सर्व सुख समृद्ध कर एक अच्छा घर रहने को दिया। इसके बाद उनके समस्त दुख दर्द दूर हो गए।

आने वाली एकादशी की तारीखें

पापांकुशा एकादशी – 27 अक्टूबर 2020

रमा एकादशी – 11 नवंबर 2020

देव उठनी एकादशी – 25 नवंबर 2020

उत्पन्ना एकादशी – 11 दिसंबर 2020

मोक्षदा एकादशी – 25 दिसंबर 2020

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