Tuesday, October 6, 2020

देखें ,यूपी में 15 लाख बिजली कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार, कई जिलों में छाया अँधेरा!..

आज एक बार फिर मै जीवन से जुड़े कुछ जरुरी तथ्यों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने सोमवार पूरे दिन कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान फॉल्ट की मरम्मत सहित उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कामकाज प्रभावित रहे।वहीं, हड़ताल कर रहे विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और सरकार के बीच सोमवार को वार्ता भी हुई, जो असफल रही। समिति ने आज से पूरे प्रदेश में आंदोलन का ऐलान किया है। जिससे सोमवार की रात लोगों का जीना मुहाल कर दिया। नवीनीकरण के विरोध में सोमवार से पूरे प्रदेश में करीब 15 लाख बिजली कर्मियों का बहिष्कार जारी है। बिजली कर्मियों के प्रदर्शन के चलते सोमवार को पूरे प्रदेश में करोड़ों लोगों को बिजली समस्या से जूझना पड़ा।

निजीकरण का विरोध के कराण ऊर्जा मंत्री के आवास सहित तीन दर्जन से अधिक मंत्रियों और करीब 150 विधायक, विधान परिषद सदस्यों के सरकारी आवास सहित राजधानी की बिजली सप्लाई ठप हो गई।
इस बीच ऊर्जा प्रबंधन और जिला प्रशासन ने बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए पुलिस के पहरे के साथ कई वैकल्पिक इंतजाम किए, लेकिन फॉल्ट के आगे सभी फेल हो गए।

वीवीआईपी इलाकों में बिजली गुल होने से पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मच गया, लेकिन बिजली अभियंताओं ने विद्युत आपूर्ति बहाल करने से मना कर दिया। आनन-फानन में मध्यांचल निगम के एमडी सूर्यपाल गंगवार ने निदेशक (तकनीकी) सुधीर कुमार को कूपर रोड उपकेंद्र भेजा। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वैकल्पिक स्त्रोत से बिजली सप्लाई बहाल हुई। लेकिन फॉल्ट के आगे सभी फेल हो गए।

बिजली गुल होते ही मंत्रियों और विधायक आवास से उपकेंद्र पर फोन आने लगे, लेकिन किसी कर्मचारी ने फोन नहीं उठाया, इससे परेशान लोगों ने अवर अभियंता, एसडीओ और अधिशासी अभियंता से सम्पर्क साधा, लेकिन सभी ने कार्य बहिष्कार का हवाला देकर बिजली फाल्ट ठीक करने से मना कर दिया। इससे पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मध्यांचल निगम के निदेशक (तकनीकी) सुधीर कुमार उपकेंद्र पहुंचे। जिसके बाद उन्होंने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बिजली सप्लाई बहाल की। वहीं गोमतीनगर, इंदिरानगर, विकासनगर, आलमबाग, जानकीपुरम, फैजुल्लागंज सहित राजधानी के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रही।

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने का जो फैसला किया है, वह सही नहीं है। हड़ताली कर्मचारियों ने सरकार को कर्मचारी संगठनों के साथ 5 अप्रैल 2018 को इस विषय पर हुए समझौते का पालन करना चाहिए। ऊर्जा प्रबंधन को लेकर हुए इस समझौते में प्रावधान था कि निजीकरण से संबंधित कोई भी निर्णय लेने के पहले सरकार कर्मचारियों को विश्वास में लेगी और बिना विश्वास में लिए कोई भी फैसला नहीं करेगी।

Tags: UP News

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